यहां हर वर्ष में विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त को मनाया जाता है। हाथियों को सुरक्षित रखने का एक विशेष आयोजन है यहां “द हिंदू रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण के कर्नाटक में 2017 के परिणाम स्वरूप जनगणना में लगभग 6,049 मुक्त हाथी पुनर्वास का प्रबंध है कर्नाटक राज्य हाथियों की एकाग्रता का सबसे बड़ा केंद्र है।
हाथी कितना सुरक्षित है
- हम बता दें कि हाथियों की प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर नहीं है बल्कि इसकी जनसंख्या में वृद्धि हुई है एवं हाथी अपने पुनर्वास में सुरक्षित है।
- यही हमारी वन विभाग टीम ने एक और संरक्षण को संतुलित रखने में प्रयासरत है।
- तो वहीं दूसरी तरफ मानव हाथी संघर्ष को कम करने का सबसे कठिन कार्य से जुड़ी है। यहां रैखिक परियोजना के द्वारा आवासीय व्यवधान वृद्धि अच्छी खबर है।
“हसन डिवीजन “ने हाथियों की मौत पर क्या कहा
- 22 सालों तक हसन डिवीजन ने 74 जंगली हाथियों को पकड़कर पुनर्वास पहुंचाया । उन्हीं में से कुछ हाथियों की मौत हुई। 17 हाथियों की मौत बिजली के झटके के कारण हुई । और कुछ अवैध मानव शिकार के द्वारा हुई।
- 2017 के रिकॉर्ड में 79 के हाथियों की मौत हुई। जिनमें से कुछ मानव द्वारा निर्मित और कुछ प्राकृतिक रुप से हुई थी।
- वन विभाग के अनुसार 30 जिलों में 14 रिंगों में पशु फल स्वरूप 40 लोगों की मौत हुई जिसकी वजह जानवरों को मानी नहीं माना जाती। 2022 मई के आंकड़ों के हिसाब से हाथियों की मौत 10 प्राकृतिक वजह से हुई जिसमें “कोडागु “क्षेत्र में बिजली के करंट लगने से मौत हुई थी इन प्राकृतिककर से मौत ज्यादा हुई।
- यह विषय चिंताजनक है क्योंकि बांदी पुर सकलेशपुर व अन्य क्षेत्र आपस में संघर्ष की स्थिति से निपट रहे हैं।
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